मेरा हमसफर

हाय गाइज़, कैसे हैं आप सब ? मैं आशा करता हूँ कि आप सभी अच्छे होंगे | मेरा नाम सुधीर है और मैं कानपुर का रहने वाला हूँ | मेरी उम्र 27 साल है और मैं अभी जॉब करता हूँ | मैं दिखने में गोरा हूँ और मेरी हाईट 5 फुट 10 इंच है और मेरा बदन पतला दुबला है | आज जो मैं आप लोगो के सामने अपनी कहानी पेश करने जा रहा हूँ ये मेरी पहली कहानी है और मेरे जीवन की सच्ची घटना है | मैं आशा करता हूँ कि आप सब को मेरी कहानी बहुत अच्छी लगेगी | असल में ये जो कहानी मैं लिख रहा हूँ ये समलैंगिकता के ऊपर है जो हमारे देश में गैरकानूनी है | लेकिन फिर भी लोग इस को गलत समझ कर आज के दौर में भी ये अपना रहे हैं | भले ही ये समाज के नजिरये से सही हो या न हो पर हमारे जैसे कुछ लोगो के लिए ये ही सही है | मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि मैं खुद भी होमोसेक्सुअल हूँ और मुझे इस बात से कोई भी आपत्ति नहीं है कि मैं आम लोगो जैसा क्यूँ नहीं हूँ |
ये घटना कुछ समय पहले की है | मेरे घर में, मेरे मम्मी, पापा, दो छोटे भाई हैं | दोस्तों मैं बचपन से ही होमोसेक्सुअल रहा हूँ और मुझे लड़किओं से ज्यादा शौक लड़को का रहा है | ये बात मुझे तब पता चली जब एक बार मैं बस में घर वालो के साथ सफ़र कर रहा था | बस में ज्यादा भीड़ थी और बैठने के लिए जगह नहीं थी तो पापा ने एक अंकल की गोद में मुझे बैठा दिया | उस समय मैं बहुत छोटा था तो मैं भी अंकल की गोद में बैठ गया | लेकिन मुझे उनका लंड अपनी गांड में महसूस होने लगा तो मुझे बड़ा मजा आने लगा तो मैं बीच बीच में अपनी गांड को अंकल के लंड पर सेट करने लगा | जब उनका लंड मेरी गांड के सेंटर में सेट हो गया तो मुझे मजा आने लगा | तब से मैं बस लंड और लंड के ही बारे में सोचने लगा | मुझे अपना लंड किसी की गांड में डालने की इच्छा होती तो कभी लंड अपनी गांड में लेने की इच्छा होती | फिर मैं बड़ा होने लगा और मुझमे लंड के प्रति चाहत बढ़ने लगी | मैं लड़को से काफी चिपकता था इसलिए सभी ने मेरा नाम चिपकू रख दिया |

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