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एक दिन मैं अपने घर से निकल रहा था घर से थोड़ी दूरी पर मैं निकला ही था की उस दिन मेरी मोटरसाइकिल खराब हो गयी इसलिए मुझे बस से ही अपने ऑफिस जाना पड़ा। घर के पास ही बस स्टॉप है वहां पर जब मैं पहुंचा तो मैं बस का इंतजार कर रहा था बस स्टॉप पर काफी ज्यादा भीड़ थी क्योंकि सुबह का वक्त था इसलिए बस में काफी भीड़ थी। जैसे ही बस आई तो मैं भी बस में चढ़ गया किसी तरह से मुझे बैठने के लिए सीट मिल गई थी और मैं बैठ गया उसके बाद मैं जब अपने ऑफिस पहुंचा तो उस दिन हमारे ऑफिस में सब लोग काफी खुश नजर आ रहे थे। मैंने अपने ऑफिस में काम करने वाले मोहित से पूछा कि मोहित आज सब लोग खुश क्यों है तो उसने मुझे बताया कि आज बॉस का जन्मदिन है और बॉस बस थोड़ी देर बाद आते ही होंगे।
हमारे बॉस काफी अच्छे हैं, जितने भी हमारे ऑफिस में काम करते है वह काफी समय से ऑफिस में काम कर रहे है बॉस का व्यवहार सब के साथ काफी अच्छा रहता है इसलिए सब उनसे बहुत खुश रहते हैं। जैसे ही वह ऑफिस में आए तो सब लोगों ने उन्हें उनकी जन्मदिन की बधाई दी और उन्होंने भी उस दिन सब लोगों को कहा कि आज लंच पर सब साथ में चलेंगे, सब लोग उस दिन लंच के लिए साथ में गए थे। शाम के वक्त मैं घर लौट आया था जब मैं घर लौटा तो मां मुझे कहने लगी कि रोहित बेटा तुम्हारे पापा अभी तक आए नहीं हैं तुम उन्हें फोन करना। मैंने पापा को फोन किया लेकिन पापा ने फोन नहीं उठाया मैं रूम में चला गया और मैं अपने कपड़े चेंज करने लगा तभी थोड़ी देर बाद पापा का फोन मुझे आया और वह कहने लगे कि बेटा बस मैं थोड़ी देर बाद घर पहुंच रहा हूं। मैंने पापा से कहा पापा क्या आप किसी जरूरी काम से कहीं गए हुए हैं तो वह मुझे कहने लगे कि नहीं बेटा मैं बस पहुंचता हूँ। थोड़ी देर बाद पापा घर पर आ गए थे मां काफी ज्यादा परेशान थी पापा जब घर आये तो पापा ने कहा कि रोहित बेटा हम लोग कुछ समय के लिए जयपुर जाना चाहते हैं। मैंने पापा से कहा पापा लेकिन जयपुर में क्या कुछ जरूरी काम है तो पापा ने बताया कि वहां उनके दोस्त के बेटे की शादी है मैंने पापा से कहा पापा क्या मुझे भी ऑफिस से छुट्टी लेनी पड़ेगी तो पापा कहने लगे कि हां बेटा।
रवीश अंकल जो पापा के बहुत ही करीबी दोस्त हैं और वह भी कई बार हमारे घर पर आ चुके हैं। हम लोग जयपुर जाने की तैयारी में थे पापा ने कहा कि बेटा तुम भी अपने ऑफिस से छुट्टी ले लेना इसलिए मैंने भी अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी और कुछ दिनों बाद हम लोग जयपुर जाने वाले थे। मैंने ट्रेन की टिकट भी बुक करवा दी थी और उस रात जब हम लोग सामान पैक कर रहे थे तो मां कहने लगी कि बेटा क्या मैं तुम्हारी मदद कर दूं मैंने मां से कहा नहीं मां मैं अपना सामान रख लूंगा। हम लोग करीब एक हफ्ते के लिए जयपुर जाने वाले थे और जब हम लोग उस दिन सुबह रेलवे स्टेशन पहुंचे तो हम लोग ट्रेन का इंतजार कर रहे थे ट्रेन करीब आधे घंटे देरी से चल रही थी। जैसे ही ट्रेन आई तो हम लोग ट्रेन में बैठ गए थे ट्रेन आधे घंटे तक रेलवे स्टेशन पर रुकने वाली थी मैंने अपना सामान रख दिया था और हम लोग ट्रेन में बैठ चुके थे। थोड़ी देर बाद ट्रेन चल पड़ी जैसे ही ट्रेन चली तो ट्रेन ने अपनी गति पकड़ ली और सफर का कुछ पता ही नहीं चला की कब हम लोग जयपुर पहुंच गए। हम लोग जयपुर पहुंच चुके थे और जब हम लोग जयपुर पहुंचे तो रवीश अंकल हम लोगों को लेने के लिए रेलवे स्टेशन आए हुए थे और फिर हम लोग उनके साथ उनके घर पर गए। हम लोग उनके घर पर पहली बार ही गए थे और मैं उनके परिवार से मिला, वह हमारे घर कई बार आ चुके थे लेकिन मैं पहली बार ही उनके बेटे से मिला था उनके बेटे का नाम सार्थक है और सार्थक एक मल्टीनैशनल कंपनी में जॉब करता है वह मुंबई में नौकरी करता है। जब मैं सार्थक से मिला तो सार्थक की उम्र मेरी जितनी ही थी मैंने सार्थक से कहा कि तुमने शादी करने का फैसला बहुत जल्दी नहीं कर लिया। वह मुझे कहने लगा कि मैं सुहानी को पहले से ही जानता था और हम दोनों का कॉलेज के समय से ही रिलेशन था इसलिए मैंने सोचा कि जल्द ही हम लोग शादी कर ले, पापा और मम्मी भी इस रिश्ते के लिए मान चुके थे। सार्थक के साथ मेरी काफी अच्छी जमने लगी थी थोड़े ही समय में हम दोनों की दोस्ती काफी अच्छी हो गई थी और अब सार्थक की शादी की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थी। जिस दिन सार्थक की शादी थी उस दिन मैं सार्थक के साथ ही था सार्थक मुझे कहने लगा कि तुम मेरे साथ ही रहना तो मैं उसके साथ ही था।

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